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About Us

Welcome to NRCO, Sikkim

The National Research Centre for Orchids was established on 5th October 1996 by the indian council of Agricultural Research (ICAR), New Delhi to organize program on improvement in productivity, quality and commercialization of orchids.

The Sikkim state authorities handed over 22.19 acres of land belonging to Regional Agricultural Centre along witha all other assets to ICAR for establishment of the centre. In October 1997, the centre also took over the CPRS, Darjeeling form CPRI and established a campus for research on temperate orchids.

Virtual Tour of ICAR-NRCO

Orchid of the month

Cymbidium

Boat orchids are one of the most beautiful types of exotic flowers frequently used in flower arrangements and corsages. Although they are more demanding than the other types of orchids grown as houseplants, their attractive, long-lasting, and large flower spikes won’t make you think twice about including them in your house plant collection.
Cymbidium orchids are evergreen plants that originated from Southeast Asia, Australia, and China (1). They are mainly cultivated as potted plants and cut flowers for commercial uses.

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From the Director's Desk

भारत में उभरते ऑर्किड उद्योग, विलुप्त होती आर्किड्स की प्रजातियों का संरक्षण एवं आर्किड जैव संसाधनों के समुचित उपयोग हेतु, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद [आई.सी.ए.आर.], नई दिल्ली ने सन १९९६ में राष्ट्रीय ऑर्किड अनुसंधान केंद्र [एन.आर.सी.ओ.] की स्थापना सिक्किम के पूर्वी जिले के पाक्योंग उप-डिवीज़न में की। स्थापना के तुरंत बाद से ही एनआरसीओ विभिन्न फोकल क्षेत्रों पर काम करना शुरू किया। जिसमे जनन द्रव्यों का संकलन, उनका लक्षण वर्णन, सजावटी और औषधीय उद्देश्यों के लिए ऑर्किड के आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण और स्थायी उपयोग, उत्पादन तकनीकों के के विकास/मानकीकरण,प्रसार, संरक्षण और कटाई के बाद की तकनीक आदि को निर्धारित कर ऑर्किड की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देना।


एन.आर.सी.ओ. में, विभिन्न विषयों के वैज्ञानिकों की टीम चार कार्यक्रमों के तहत अनुसंधान करती है: (i) ऑर्किड के जनन द्रव्यों में विविधता का लक्षण वर्णन और उनका समुचित उपयोग करना, (ii) जैविक और अजैविक तनावों के लिए उपज, गुणवत्ता और प्रतिरोध के लिए आर्किड्स की प्रजातियों में आनुवंशिक सुधार करना, (iii) उत्पादकता एवं फसल सुरक्षा संबंधी तकनीकों का विकास कर बेहतर उत्पादकता, विपणन और ऑर्किड के उपयोग के लिए उत्पादन संबंधी प्रौद्योगिकी को किसानों को मुहैय्या करवाना, और (iv) ऑर्किड के उत्पादन में सुधार के लिए हितधारकों के ज्ञान और कौशल में सुधार करना।


एन.आर.सी.ओ. ने आर्किड की खेती के अनुसंधान और विकास में सराहनीय प्रगति की है। यह देश में सबसे बड़े आर्किड जर्मप्लाज्म कंजर्वेटरी में से एक है, जिसमें 124 जेनेरा से 360 प्रजातियों के साथ 3150 आर्किड के जनंद्र्व्यों का संग्रह शामिल हैं। इन संग्रहों में से 1068 संग्रह आई.सी. नंबरों के लिए नेशनल ब्यूरो फॉर प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज [एनबीपीजीआर], नई दिल्ली के साथ पंजीकृत हैं। विभिन्न प्रजातियों के संग्रहण/प्रजातियों का आणविक लक्षण वर्णन किया गया और एन.सी.बी.आई. में 410 अद्वितीय अनुक्रम जमा किए गए हैं। संस्थान ने संकटग्रस्त और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण ऑर्किड, विकसित/मानकीकृत उत्पादन और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण ऑर्किड के लिए कटाई के बाद की प्रक्रियाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रोटोकॉल विकसित किए हैं ताकि ऑर्किड उत्पादन और उत्पादकता एवं विपणन को बढ़ावा दिया जा सके।


एन.आर.सी.ओ. ने आर्किड की खेती के अनुसंधान और विकास में सराहनीय प्रगति की है। यह देश में सबसे बड़े आर्किड जर्मप्लाज्म कंजर्वेटरी में से एक है, जिसमें 124 जेनेरा से 360 प्रजातियों के साथ 3150 आर्किड के जनंद्र्व्यों का संग्रह शामिल हैं। इन संग्रहों में से 1068 संग्रह आई.सी. नंबरों के लिए नेशनल ब्यूरो फॉर प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज [एनबीपीजीआर], नई दिल्ली के साथ पंजीकृत हैं। विभिन्न प्रजातियों के संग्रहण/प्रजातियों का आणविक लक्षण वर्णन किया गया और एन.सी.बी.आई. में 410 अद्वितीय अनुक्रम जमा किए गए हैं। संस्थान ने संकटग्रस्त और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण ऑर्किड, विकसित/मानकीकृत उत्पादन और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण ऑर्किड के लिए कटाई के बाद की प्रक्रियाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रोटोकॉल विकसित किए हैं ताकि ऑर्किड उत्पादन और उत्पादकता एवं विपणन को बढ़ावा दिया जा सके। संकर किस्मों के विकास और विमोचन का कार्य विभिन्न चरणों कार्य-वद्ध है और जल्द ही किस्में व्यावसायिक खेती के लिए उपलब्ध होंगी। राष्ट्रीय आर्किड्स अनुसन्धान केंद्र, सिक्किम, डी.यू. एस. परीक्षण के लिए एक नोडल केंद्र होने के नाते, इसने 07 प्रमुख वाणिज्यिक आर्किड प्रजातियों के लिए डीयूएस परीक्षण दिशानिर्देश विकसित किए हैं।


ऑर्किड के आर्किड उत्पादन में सुधार के लिए हितधारकों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाने के लिए, एन.आर.सी.ओ. विभिन्न हितधारकों के लिए प्रशिक्षण, क्षेत्र दिवस, प्रौद्योगिकी सप्ताह, किसान मेला और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन आयोजित करता है। एनआरसीओ मोबाइल ऐप ऑर्किड फार्मिंग, ऑर्किडोपीडिया, ऑर्किडमैन, आर्किड कीट प्रबंधन और आर्किड डेटाबेस एवं व्हात्ट्स एप्प ग्रुप के माध्यम से अपने हितधारकों तक पहुंचता है।


ऑर्किड देश के लिए, विशेष रूप से देश के पहाड़ी और समुद्र तटीय क्षेत्रों के लिए बहुत उपयोगी हैं। इन क्षेत्रों में आर्किड की खेती भारत में एक वरदान साबित हो सकती है। एनआरसीओ में, हम सभी मानते हैं कि एकीकृत और सहक्रियात्मक अनुसंधान समाज में योगदान जारी रखने के लिए आवश्यक है। इसलिए, सभी क्षेत्रों के भागीदार और विभिन्न हितधारक बहु-विषयक, अंतःविषय और अंतःविषय दृष्टिकोण के माध्यम से हमारे संस्थान के साथ सहयोग करते हैं। हम एन.आर.सी.ओ. की मजबूत नींव और लोगों के सहयोग एवं अपने प्रयासों के माध्यम से भारत में अधिक से अधिक आर्किड्स की खेती के प्रसार के लिए दृढ़ हैं। आर्किड जैव विविधता सभी के लिए प्रकृति का एक अनमोल उपहार है। आइए हम इन कीमती रत्नों को संरक्षित करें और समाज के लाभ के लिए इनका प्रयोग करें। मुझे आशा है कि आपके सहयोग से हम एनआरसीओ को और ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सफल होंगे।


The Indian Council of Agricultural Research [ICAR] established the National Research Centre for Orchids [NRCO] at Pakyong in the East district of Sikkim to support the emerging orchid industry, conservation and sustainable use of the country's orchid bio-resources through research. Since its inception in 1996, NRCO has been working on various focal areas, namely, collection, characterisation, conservation and sustainable use of genetic resources of orchids for ornamental and medicinal purposes, development/standardisation of production, propagation, protection and post-harvest technologies for commercial cultivation of orchids.


At NRCO, teams of scientists from different disciplines undertake research under four programmes: (i) characterisation and sustainable use of diversity in orchids, (ii) genetic improvement of orchids for yield, quality and resistance to biotic and abiotic stresses, (iii) development and refinement of production and protection technologies for improved productivity, marketing and utilization of orchids, and (iv) improvement of knowledge and skill of stakeholders for improving production of orchids.


In the last 25 years, the NRCO has made commendable strides in the research and development of orchid cultivation in the country. It has one of the largest orchid germplasm conservatories in the country, comprising 3150 orchid collections with 360 species from 124 genera. Of these collections, 1068 collections are registered for IC Numbers with National Bureau for Plant Genetic Resources [NBPGR], New Delhi. Molecular characterisation of the collections/species under different genera were conducted and 410 unique sequences have been submitted to NCBI. The institute has developed mass propagation protocols for several threatened and commercially important orchids, developed/standardised production and post-harvest procedures for commercially important orchids to promote orchid production and productivity. The several of its hybrids are at various stages of development and release and soon will be available for commercial cultivation. Being Nodal Centre for DUS testing, it has developed DUS testing guidelines for 07 major commercial orchid genera.


To enhance the knowledge and skills of stakeholders to improve orchid production of orchids, NRCO conducts training, field days, technology weeks, kisan melas and technology demonstrations for various stakeholders. NRCO also reaches out to its stakeholders through the mobile apps Orchid Farming, OrchidoPedia, OrchidMAN, Orchid Pest Management and through the Orchid Database and Whatsapp Groups.


Orchids hold great promise of economic opportunity in the country, especially for the hilly and coastal regions of the country. At NRCO, we believe that integrated and synergistic research is essential to keep abreast and continue contributing to society. Therefore, partners from all sectors and various stakeholders collaborate with our institute through multidisciplinary, interdisciplinary and transdisciplinary approaches. We are determined to continue to build on the strong foundation and mandates of NRCO and scale greater heights through our efforts. Orchid biodiversity is a precious gift of nature for all. Let us join hands with determination to preserve these precious jewels and promote them for the benefit of society. I wish that with support from all the stakeholders, well-wishers and orchid lovers, will succeed in taking NRCO further heights.

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डा. रामपाल

निदेशक (कार्यकारी)

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